SEBI नियम 2026: Hidden Charges पर 30 साल बाद बड़ा फैसला?
SEBI ने म्यूचुअल फंड के नियम क्यों बदले?
(1996 vs 2026, बढ़ते निवेशक, पारदर्शिता की जरूरत)
SEBI Mutual Fund Rules 2026 को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि SEBI ने 30 साल बाद नियम बदलने की जरूरत क्यों महसूस की? इसका सीधा जवाब है – Hidden Charges और निवेशकों की बढ़ती संख्या।
साल 1996 में जब म्यूचुअल फंड के नियम बने थे, तब निवेशक बहुत कम थे। न तो डिजिटल प्लेटफॉर्म थे और न ही SIP जैसी सुविधाएं आम थीं। उस समय खर्चे एक ही नंबर में दिखाए जाते थे, जिसे Total Expense Ratio (TER) कहा जाता था।
निवेशकों को सिर्फ एक आंकड़ा नजर आता था, लेकिन उसके अंदर कितने Hidden Charges छिपे हैं, यह साफ नहीं होता था ।
अब 2025–26 तक स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। करोड़ों रिटेल निवेशक म्यूचुअल फंड से जुड़ चुके हैं, SIP हर घर तक पहुंच चुकी है और निवेशक अब सवाल पूछने लगे हैं।
SEBI को लगा कि पुराने नियम आज के समय में जटिल, भारी और निवेशक विरोधी बन चुके हैं ।
इसी वजह से SEBI ने Mutual Fund Regulations 2026 को मंजूरी दी। नए नियमों में सबसे बड़ा फोकस पारदर्शिता (Transparency) पर है।
नियमों को 162 पेज से घटाकर 88 पेज कर दिया गया और शब्दों की संख्या भी लगभग आधी कर दी गई, ताकि भ्रम कम हो और जानकारी साफ मिले ।
अब TER को अलग-अलग हिस्सों में दिखाया जाएगा, जिससे निवेशक साफ समझ पाएंगे कि कहां असली खर्च है और कहां Hidden Charges। यानी निवेशक अब अंधेरे में नहीं रहेगा।
कुल मिलाकर, SEBI ने नियम इसलिए बदले ताकि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ज्यादा साफ, सस्ती और निवेशक-हितैषी बन सके। यह बदलाव सिर्फ नियमों का नहीं, बल्कि निवेशकों के भरोसे का है।
SEBI Mutual Fund Regulation 2026: नए नियम क्या कहते हैं?
(पुराने नियम खत्म, नया सरल ढांचा, नियमों की कटौती)
SEBI Mutual Fund Regulation 2026 म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए 30 साल बाद सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इन नए नियमों का सबसे बड़ा मकसद है – Hidden Charges को खत्म करना और निवेशकों को साफ-सुथरी जानकारी देना।
अब तक म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री 1996 के पुराने नियमों पर चल रही थी। उस समय निवेशक कम थे, डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं थे और खर्चे साफ नजर नहीं आते थे।

लेकिन 2025 तक हालात बदल गए। करोड़ों रिटेल निवेशक जुड़ चुके हैं और SIP हर घर तक पहुंच चुकी है। ऐसे में SEBI को लगा कि पुराने नियम अब जटिल और निवेशक विरोधी हो चुके हैं
इसी वजह से SEBI ने पुराने नियमों को पूरी तरह खत्म कर Mutual Fund Regulation 2026 लागू करने का फैसला लिया।
नए नियमों में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि नियमों को सरल और छोटा बनाया गया है।
पहले जहां नियमों की किताब 162 पेज की थी, अब उसे घटाकर सिर्फ 88 पेज कर दिया गया है। साथ ही शब्दों की संख्या भी लगभग 67,000 से घटाकर 31,000 कर दी गई है
इसका मतलब – कम कागज, कम भ्रम और ज्यादा स्पष्टता।
नए नियमों का फोकस पूरी तरह Transparency और Hidden Charges पर है।अब खर्चों को छुपाया नहीं जा सकेगा। निवेशकों को साफ-साफ पता चलेगा कि उनका पैसा कहां और कैसे खर्च हो रहा है।
SEBI चेयरमैन के मुताबिक, यह बदलाव निवेशकों के नजरिए से किया गया है ताकि भविष्य में कोई भी चार्ज या बदलाव सीधे और खुले तौर पर दिखे
कुल मिलाकर, SEBI Mutual Fund Regulation 2026 एक नया, आसान और निवेशक-हितैषी ढांचा लेकर आया है, जहां Hidden Charges की जगह पारदर्शिता होगी और निवेशक सबसे ऊपर होगा।
TER में ऐतिहासिक बदलाव: अब खर्च कैसे दिखेंगे?
(TER का बंटवारा, Hidden Charges खत्म)
SEBI Mutual Fund Rules 2026 का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव TER यानी Total Expense Ratio में किया गया है। यही वह जगह थी जहां सालों से Hidden Charges छिपे रहते थे, और आम निवेशक को इसका अंदाजा तक नहीं होता था।
अब तक क्या होता था?
पहले TER में सब कुछ मिला-जुला होता था – फंड मैनेजर की फीस, ब्रोकरेज, GST, STT, स्टांप ड्यूटी, SEBI फीस और एक्सचेंज चार्ज। निवेशक को बस एक ही नंबर दिखता था, लेकिन उस नंबर के अंदर कितने और कैसे खर्च कट रहे हैं, यह पूरी तरह छुपा रहता था
SEBI Mutual Fund Regulation 2026 में इस सिस्टम को पूरी तरह बदल दिया गया है। अब TER को तीन साफ हिस्सों में बांट दिया गया है, ताकि कोई भी Hidden Charges छुप न सकें
पहला हिस्सा – Base Expense Ratio (BER):
इसमें सिर्फ फंड चलाने की असली लागत होगी, जैसे फंड मैनेजर की फीस और एडमिन खर्च।
दूसरा हिस्सा – Brokerage Cost:
शेयर खरीदने-बेचने का खर्च, जो इक्विटी और डेरिवेटिव में अलग-अलग दिखेगा।
तीसरा हिस्सा – Statutory और Regulatory Charges:
GST, STT, CTT, स्टांप ड्यूटी, SEBI फीस और एक्सचेंज चार्ज – अब यह सब अलग से और साफ नजर आएगा।
इसके अलावा SEBI ने Exit Load से जुड़ा 5 बेसिस पॉइंट का अतिरिक्त खर्च पूरी तरह खत्म कर दिया है, जिससे निवेशकों का सीधा फायदा होगा
SEBI चेयरमैन के अनुसार, इस बदलाव से मार्केट में पारदर्शिता आएगी, और भविष्य में टैक्स या चार्ज में कोई भी बदलाव होगा तो वह तुरंत और साफ-साफ निवेशकों को दिखेगा
कुल मिलाकर, TER का यह नया ढांचा म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में Hidden Charges के दौर को खत्म करता है और निवेशकों को उनके पैसों पर पूरा कंट्रोल देता है।
Base Expense Ratio (BER), Brokerage और Regulatory Charges का नया सिस्टम
(तीनों हिस्सों की साफ-साफ व्याख्या)
SEBI Mutual Fund Rules 2026 का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब म्यूचुअल फंड में लगने वाले Hidden Charges पूरी तरह सामने आ जाएंगे।
पहले निवेशक को सिर्फ एक TER नंबर दिखता था, लेकिन उसके अंदर क्या-क्या खर्च छुपा है, यह समझना मुश्किल था। अब SEBI ने खर्चों को तीन अलग-अलग हिस्सों में साफ-साफ दिखाने का नया सिस्टम लागू किया है
Base Expense Ratio (BER) क्या है?
BER का मतलब है फंड चलाने की असल लागत। इसमें सिर्फ फंड मैनेजर की फीस, एडमिन खर्च और ऑपरेशनल खर्च शामिल होंगे। इसमें कोई टैक्स, ब्रोकरेज या सरकारी चार्ज नहीं होगा। यानी निवेशक अब साफ देख पाएगा कि फंड हाउस असल में कितना चार्ज कर रहा है
Brokerage Charges कैसे दिखेंगे?
अब शेयर खरीदने-बेचने का खर्च अलग से दिखाया जाएगा।
इक्विटी कैश सेगमेंट में ब्रोकरेज को औसतन 12 बेसिस पॉइंट से घटाकर 6 बेसिस पॉइंट कर दिया गया है।
डेरिवेटिव सेगमेंट में ब्रोकरेज 1 से बढ़ाकर 2 बेसिस पॉइंट की गई है, लेकिन यह भी अलग से दिखाई जाएगी
इससे निवेशक समझ पाएगा कि ट्रेडिंग पर कितना खर्च हो रहा है।
Regulatory और Statutory Charges क्या होंगे?
अब GST, STT, CTT, स्टांप ड्यूटी, SEBI फीस और एक्सचेंज चार्ज अलग से दिखेंगे। पहले यही चार्ज Hidden Charges बनकर TER में छुप जाते थे
SEBI चेयरमैन के मुताबिक, इस नए सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में टैक्स या चार्ज में कोई बदलाव होगा तो उसका फायदा या असर सीधे निवेशकों तक पहुंचेगा
कुल मिलाकर, यह नया ढांचा म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में Hidden Charges को खत्म करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है, जिससे निवेशक ज्यादा समझदारी और भरोसे के साथ निवेश कर पाएंगे।
Performance Based Expense Structure और सस्ते Passive Funds
(No Performance – No Extra Fees, Index / ETF / Liquid Funds)
SEBI Mutual Fund Rules 2026 में एक और बड़ा और निवेशक-हितैषी बदलाव किया गया है, जिसका सीधा असर Hidden Charges पर पड़ता है। अब म्यूचुअल फंड में “ज्यादा फीस” लेने का पुराना तरीका धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है।
Exit Load और Brokerage Charges पर SEBI का बड़ा फैसला
(5 BPS खत्म, Equity & Derivatives Brokerage Limits)
SEBI Mutual Fund Rules 2026 में Hidden Charges को लेकर एक और बड़ा और राहत भरा फैसला लिया गया है। यह फैसला सीधे तौर पर Exit Load और Brokerage Charges से जुड़ा है, जो अब तक निवेशकों के लिए कम समझ में आने वाले और छुपे हुए खर्च बने हुए थे।
सबसे पहले बात करते हैं Exit Load की।
अब तक जब कोई निवेशक म्यूचुअल फंड से जल्दी बाहर निकलता था, तो Exit Load के नाम पर सिर्फ चार्ज ही नहीं लगता था, बल्कि फंड हाउस को 5 बेसिस पॉइंट (BPS) का अतिरिक्त खर्च लगाने की छूट भी मिल जाती थी।
यही अतिरिक्त खर्च कई बार Hidden Charges बनकर निवेशक की नजर से छुपा रहता था।
SEBI ने इस सिस्टम को पूरी तरह खत्म कर दिया है। अब Exit Load अलग रहेगा और कोई एक्स्ट्रा 5 BPS खर्च नहीं जोड़ा जा सकेगा।
इससे लगभग 600 से ज्यादा स्कीम्स में निवेश करने वाले निवेशकों को सीधा फायदा होगा और उनका पैसा बचेगा
अब बात करते हैं Brokerage Charges की।
Equity Cash Segment में पहले औसतन 12 बेसिस पॉइंट ब्रोकरेज लगती थी। SEBI ने इसे घटाकर 6 बेसिस पॉइंट कर दिया है, जो अब टैक्स के अलावा होगी
Derivatives Segment में पहले ब्रोकरेज लगभग 1 बेसिस पॉइंट थी, जिसे अब 2 बेसिस पॉइंट कर दिया गया है, लेकिन इसे भी अलग से और साफ दिखाया जाएगा
SEBI चेयरमैन के मुताबिक, इन बदलावों से मार्केट में पारदर्शिता बढ़ेगी और निवेशकों को यह साफ समझ आएगा कि उनका पैसा ट्रेडिंग में कितना खर्च हो रहा है
कुल मिलाकर, Exit Load से जुड़ा 5 BPS खत्म करना और Brokerage Charges की स्पष्ट सीमा तय करना म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में Hidden Charges के युग को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम है।
इससे निवेशक ज्यादा भरोसे और स्पष्ट जानकारी के साथ निवेश कर पाएंगे।
सबसे पहले बात करते हैं Performance Based Expense Structure की।
SEBI ने पहली बार यह नियम मंजूर किया है कि अगर फंड अच्छा प्रदर्शन करेगा, तभी फंड मैनेजर को ज्यादा फीस मिलेगी। मतलब साफ है – No Performance = No Extra Fees।
अगर फंड रिटर्न नहीं दे पाया, तो निवेशक से अतिरिक्त खर्च नहीं वसूला जा सकेगा। हालांकि यह नियम कुछ चुनिंदा स्कीम्स पर लागू होगा और इसके लिए SEBI ने साफ गाइडलाइंस भी तय की हैं
इससे पहले फंड का प्रदर्शन चाहे जैसा हो, फीस तय रहती थी और यही Hidden Charges का बड़ा कारण बनता था।
अब बात करते हैं Passive Funds की, यानी Index Funds, ETF और Liquid Funds।
SEBI ने इन फंड्स को और सस्ता बना दिया है ताकि आम निवेशक को लंबी अवधि में ज्यादा फायदा मिले।
पहले Index Funds, ETF और Liquid Funds पर 1% तक Expense Ratio लगता था। अब इसे घटाकर 0.9% कर दिया गया है
इसी तरह Close-ended Equity Schemes में भी Expense Ratio 1% से घटाकर 0.9% कर दिया गया है
SEBI का मानना है कि Passive Investing में ज्यादा मैनेजमेंट की जरूरत नहीं होती, इसलिए ज्यादा चार्ज लेना सही नहीं है। इस बदलाव से Hidden Charges कम होंगे और लॉन्ग टर्म में निवेशकों को ज्यादा रिटर्न मिलेगा।
कुल मिलाकर, Performance Based Fees और सस्ते Passive Funds का यह कदम म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को ज्यादा ईमानदार, पारदर्शी और निवेशक-केंद्रित बनाता है।
यह बदलाव उन निवेशकों के लिए बड़ी राहत है, जो बिना छिपे खर्च के निवेश करना चाहते हैं।
नए नियमों से निवेशकों को क्या फायदा होगा?
(कम खर्च, ज्यादा पारदर्शिता, बेहतर रिटर्न)
SEBI Mutual Fund Rules 2026 म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए सिर्फ नियमों में बदलाव नहीं है, बल्कि यह Hidden Charges से आज़ादी का रास्ता है।
इन नए नियमों का सीधा फायदा आम निवेशकों को मिलेगा, जो अब तक कई बार बिना जाने अतिरिक्त खर्च चुका रहे थे।
सबसे पहला और बड़ा फायदा – कम खर्च (Lower Cost)
SEBI ने Exit Load से जुड़ा 5 बेसिस पॉइंट (BPS) का अतिरिक्त खर्च पूरी तरह खत्म कर दिया है। इससे करीब 600 से ज्यादा स्कीम्स में निवेश करने वालों का पैसा बचेगा
इसके अलावा Equity Cash Segment में ब्रोकरेज को 12 BPS से घटाकर 6 BPS कर दिया गया है, जिससे ट्रेडिंग का खर्च भी कम होगा
Passive Funds जैसे Index Funds, ETF और Liquid Funds को भी सस्ता किया गया है, जहां Expense Ratio 1% से घटाकर 0.9% कर दिया गया है
दूसरा बड़ा फायदा – ज्यादा पारदर्शिता (More Transparency)
अब तक TER में सारे खर्च छुपे रहते थे, जिससे Hidden Charges समझना मुश्किल था। नए नियमों में TER को तीन हिस्सों में बांटा गया है – Base Expense Ratio (BER), Brokerage और Regulatory Charges।
अब निवेशक साफ देख पाएगा कि उसका पैसा कहां और क्यों खर्च हो रहा है
तीसरा फायदा – बेहतर रिटर्न (Better Returns)
जब खर्च कम होंगे और छिपे चार्ज खत्म होंगे, तो लॉन्ग टर्म में निवेशक को ज्यादा रिटर्न मिलेगा। साथ ही SEBI ने पहली बार Performance Based Expense Structure को मंजूरी दी है, यानी अगर फंड अच्छा परफॉर्म करेगा तभी ज्यादा फीस ली जा सकेगी – No Performance, No Extra Fees
SEBI चेयरमैन के मुताबिक, इन बदलावों से मार्केट में साफ-सफाई आएगी और भविष्य में टैक्स या चार्ज में कोई भी बदलाव सीधे निवेशकों तक पहुंचेगा
कुल मिलाकर, नए नियम निवेशकों के लिए कम खर्च, कम भ्रम और ज्यादा भरोसे वाला म्यूचुअल फंड सिस्टम लेकर आए हैं, जहां Hidden Charges की कोई जगह नहीं है।
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